अकल बादाम खाने से नहीं ठोकर खाने से आती है
अकल बादाम खाने से नहीं ठोकर खाने से आती है
दोस्तों जब मै छोटा था और जब मम्मी सुबह बादाम खाने को देती तब मेरे पापा रोजाना एक बात कहा करते थे बेटा तुम कितने भी बादाम कहा लो मगर जो ज़िंदगी तुम्ह समझ (अकल) सिखाएगी वो तुम चाहे कितने भी बादाम खा लो वो तो तुम्ह आने वाला समय सिखाएगा क्यों की बेटा अकल बादाम खाने से नहीं ठोकर खाने से आती है और वो बात मेरे पापा की मुझे आज तक याद हे दोस्तों और जब में बडा होने लगा और जब मुझे अपने फैसले खुद लेने पड़ते तब मुझे समझ आता मेरे पापा की कही वो बात क्यों की यह जरूरी नहीं था के जो फैसला मेने लिया है वो सही है के नहीं जब में उस काम को कर लेता तब समझ आता के मेने सही फैसला लिया है या गलत पर मै दोस्तों उस बात को आज तक नहीं भूल पाया अगर दोस्तों मेरे पापा की कही बात आपको सही लगती हे तो अपना कोई ऐसी घटना कमेंट में लिखिए जिसने आप को बदल दिया और आज खुश हैं के वो घटना हुई जिसकी वजह से आज मै एक अच्छी जगह हु दोस्तों प्लीज कमेंट जरूर करे देखना आप को अपनी वह घटना शेयर कार के कितनी ख़ुशी मिलती है
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